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जामिया में हुई हिंसा को लेकर छात्रा ने बताई आपबीती, सुनकर सिहर जाएंगे आप

देशभर में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर लगातार विरोध हो रहे हैं। हालांकि यह बिल दोनों सदनों में पास होकर अब कानून का रूप ले चुका है लेकिन इसके बावजूद इसे लेकर विरोध जारी है अफसोस की बात तो यह है कि यह विरोध इतना ज्यादा बढ़ गया कि रविवार की शाम दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में हिंसा शुरू हो गई यह हिंसा जिनी ज्यादा बढ़ गई की इसे दंगे का रूप लेने में जरा भी वक्त नही लगा। दरअसल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह हिंसा पुलिस और छात्रों के बीच शुरू हुआ जिसके बाद कल शाम दिल्ली के जामिया नगर से लगे सराय जुलैना के पास डीटीसी की तीन बसों को आग लगाने से बात शुरू हुई और फिर राजधानी दहल उठी।

जामिया में हुई हिंसा से सदमे में छात्रा

इस घटना को लेकर जब छात्रों से बात की गई तो उनका कहना है कि पुलिस ने यूनिवर्सिटी में घुसकर उनसे मारपीट की। जिसकी वजह से करीब 200 छात्र जख्मी हो गए। कॉलेज की कुलपति का कहना है कि पुलिस ने बिना किसी के इजाजत के ही कॉलेज के अंदर प्रवेश किया और लाईब्रेरी में बैठे छात्रों पर लाठियां बरसाई। इन सभी हिंसक झड़प में जामिया की एक छात्रा ने सामने आकर अपने साथ हुई एक एक बात बताई। छात्रा ने साफतौर पर कहा कि जब ये सब शुरू हुआ तो हम लाइब्रेरी में थे। हमें सुपरवाइजर की ओर से एक कॉल आया कि सब खराब होता जा रहा है। मै वहां से निकल रही थी लेकिन उसी वक्त छात्रों का एक झुंड भागते हुए आया और 30 मिनट में लाइब्रेरी छात्रों से भर गई।

मैंने देखा कि कुछ लड़कों के सिर से खून निकल रहा है। कुछ पुलिस वाले अंदर आए और जोर-जोर से गालियां देने लगे। उन्होंने सभी को बाहर जाने के लिए बोला मैं अपने हॉस्टल की बिल्डिंग की ओर आगे बढ़ने लगी। मैंने देखा कि लड़के सड़क पर गिरे पड़े हैं जो कि बेहोशी की हालत में थे।

‘जब हम लोग जा रहे थे तो हमारे हाथ ऊपर थे। आखिरकार मैं हॉस्टल पहुंच गई। थोड़ी देर बाद कुछ लड़के हमारे हॉस्टल में भागते हुए आए और कहा कि लड़कियों को पीटने के लिए महिला पुलिसकर्मी यहां आ रही हैं। मैं उनसे बचने के लिए दूसरी जगह चली गई। कुछ देर बाद मैं हॉस्टल में लौटी। उस दौरान मैंने देखा कि लड़कों के कपड़े खून से सने हैं।’ छात्रा येसब देख बहुत घबराई हुई थी उसने बताया की ‘हमें लगता था कि छात्रों के लिए दिल्ली सबसे सुरक्षित है और ये एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है।

लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है हम पूरी रात रोते रहे? ये क्या हो रहा है? येसब कुछ खुद से ही पूछते रहे। मुझे नहीं पता कि हम लोग कहां जाएंगे और कब हम भीड़ का शिकार हो जाएंगे। मैं मुस्लिम नहीं हूं फिर भी मैं पहले दिन से आगे खड़ी हूं, तो मैं क्यों लड़ रही हूं। हमारी पढ़ाई का क्या फायदा है अगर हम सही के साथ खड़े नहीं हो सकते।

आखिर क्या है नया नागरिकता कानून, इसके लागू होने से किसके लिए क्या बदल गया

आपको ये सब सुनकर तो यही लगता होगा कि इसमें उन छात्रों की क्या गलती जो बिना किसी वजह के इस हिंसा के शिकार हो गए। आखिर उन बच्चों ने क्या गलती की थी, वो अपने घरों से पढ़ाई करने आये थे न कि हिंसा में शहीद होने।

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